Shayari•Apr 23, 2026
1 min readकुछ लोग ख़ामोशी से चले जाते हैं, मगर उनकी ख़ामोशी कभी नहीं जाती। वो जो कह न सके किसी महफ़िल में, वो बात तन्हाई में समझ आती है।
एक गहरा एहसास उस ख़ामोशी के बारे में जो लफ़्ज़ों से ज़्यादा भारी होती है और तन्हा रातों में गूंजती है।
— PoetryKitaab EditorialRead piece