PoetryKitaab Words & Emotions
Shayari (शायरी)

ख़ामोशी और तन्हाई — गहरा हिंदी-उर्दू शेर

कुछ लोग ख़ामोशी से चले जाते हैं, मगर उनकी ख़ामोशी कभी नहीं जाती। वो जो कह न सके किसी महफ़िल में, वो बात तन्हाई में समझ आती है।
— PoetryKitaab Editorial 1 min read
Download Image

Reflection & Context

एक गहरा एहसास उस ख़ामोशी के बारे में जो लफ़्ज़ों से ज़्यादा भारी होती है और तन्हा रातों में गूंजती है।

Related Pieces in The Archive

More in Shayari →